खटीमा। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से शारदा नहर में कम पानी छोड़ने के चलते लोहियाहेड पावर हाउस में विद्युत उत्पादन घट गया है। 41.4 मेगावाट विद्युत उत्पादन करने वाले पावर हाउस में दो टरबाइनों के चलने से मात्र 20 मेगावाट ही उत्पादन हो पा रहा है। इसका असर बिजली की सप्लाई पर भी देखने को मिल रहा है।
करीब सात दशक पहले पहाड़ों से निकलने वाली शारदा नदी से बिजली उत्पादन की योजना बनाई गई, ताकि क्षेत्र के उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी की जा सके। इसके बाद बनबसा से अलग नहर का निर्माण कर वर्ष 1955 में 41.4 मेगावाट क्षमता वाले लोहियाहेड शारदा पावर हाउस का निर्माण कराया गया। इसकी तीन टरबाइनों से बिजली का उत्पादन किया जाता है, जहां से खटीमा, सितारगंज के अलावा चंपावत जिले के टनकपुर, बनबसा और यूपी के पीलीभीत जिले तक बिजली की सप्लाई होती है।
कितने पानी की जरूरत?
इसके अलावा क्षेत्र के औद्योगिक आस्थानों को भी यहां से बिजली की आपूर्ति की जाती है। तीनों टरबाइनों को सुचारु रुप से चलाने के लिए 9500 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन इन दिनों उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से शारदा नहर में मात्र 5500 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है, जिस कारण दो टरबाइनें ही चल पा रही हैं, जिनसे मात्र 20 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है।
लोहियाहेड पावर हाउस के उप महाप्रबंधक पुनीत कुमार का कहना है कि कम पानी मिलने की वजह से दो टरबाइनें ही चल पा रही है, जिनसे बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। अधिक पानी मिलने के बाद तीनों टरबाइनें चलाई जाएगी।