अनुसार इस पहल से राजस्व न्यायालयों पर दबाव रहेगा। साथ ही कामकाज में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

सबसे अहम यह कि आमजन को बड़ी सहूलियत मिलेगी और उन्हें राजस्व न्यायालयों के चक्कर काटने के झंझट से निजात मिलेगी। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाएं रहेंगी। कुछ समय बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी।