चमोली : मेहलचौरी में पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, दो गांव में चार गाय को बनाया था निवाला

गैरसैंण के सीमावर्ती अल्मोड़ा जिले के पुराना लोहवा गांव में एक गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। यह गुलदार पहले परसारा और पुराना लोहवा में चार गाय का शिकार कर चुका था। वन विभाग ने इसे अल्मोड़ा चिड़ियाघर भेजने की बात कही है। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, लेकिन क्षेत्र में अन्य गुलदारों की संभावना को देखते हुए दूसरा पिंजरा भी लगाया गया है। ग्रामीण गुलदारों की बढ़ती संख्या और वन विभाग की सीमित गश्त को लेकर चिंतित हैं।

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मेहलचौरी: विकासखंड गैरसैंण के सीमावर्ती जनपद अल्मोड़ा के पुराना लोहवा गांव में लंबे समय से सक्रिय एक गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। सोमवार तड़के चार बजे वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में गुलदार के फंसने की सूचना रानीखेत वन प्रभाग के अधिकारियों को दी गई।

वन विभाग के कर्मचारियों ने कैद गुलदार को पिंजरे सहित जिला मुख्यालय अल्मोड़ा के चिड़ियाघर भेजने की बात कही है। वहीं गुलदार के पकड़े जाने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि वन विभाग ने क्षेत्र में अन्य गुलदार होने की संभावना को देखते हुए कुछ घंटों बाद ही गांव में दूसरा पिंजरा भी लगा दिया।

मेहलचौरी से सात किमी दूर ब्लाक चौखुटिया में 23 और 24 दिसंबर को क्षेत्र के परसारा और पुरानालोहवा गांव में गुलदार ने चार गायों को शिकार बनाया था। इसके बाद पिंजरा लगाने का निर्णय लिया गया था। दस दिनों के बाद गुलदार के पिंजरे में फंसने से अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह इस क्षेत्र से बाहर नहीं गया था।

ग्रामीण संजय नेगी, राजेन्द्र सिंह, मोहन सिंह और सेवानिवृत वनकर्मी प्रेम सिंह का कहना है कि गुलदारों की बढ़ती संख्या के बावजूद वन विभाग की सीमित गश्त के कारण गोवंश लगातार गुलदार का शिकार बन रहे हैं।

विकासखंड गैरसैंण के ऊजिटिया, रंगचौणा और भंडारीखोड गांवों में पिछले सप्ताह गुलदार के गोवंश को निवाला बनाने के बाद ऊजिटिया में लगाया गया पिंजरा महज तीन दिनों में हटा दिया गया था। इस पर चिंतित ग्रामीणों ने दोबारा पिंजरा लगाने की मांग की है।

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पंडित विराज कुमार शर्मा इस न्यूज़ पोर्टल के मुख्य संपादक हैं श्री विराज कुमार शर्मा ने लगभग 25 से अधिक वर्षों तक विभिन्न न्यूज पेपर्स के साथ कार्य किया है जैसे दैनिक आज शाह टाइम्स और मुख्यतः उन्होंने लगभग 24 वर्ष दैनिक जागरण के साथ कार्य किया है
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