हल्द्वानी । डा. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) गरीब और मजबूर लोगों का सहारा है, लेकिन 15 दिन से भर्ती हूं। अभी तक आपरेशन नहीं हो सका है। गर्दन की नस दबने से शरीर में करंट जैसा लगता है। बड़े डाक्टर साब कहते हैं कि जूनियर डाक्टर नहीं हैं, इसलिए आपरेशन नहीं हो सकता है।
ऐसी अव्यवस्था देखकर सोच रहा हूं कि अपने पास पैसे होते तो प्राइवेट में दिखा लेता। यह पीड़ा पंतनगर निवासी मरीज भुवन चंद्र की है। ऐसे ही समस्या 20 से अधिक मरीजों की है। ये मरीज न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती हैं। दुर्भाग्य है कि इस पीड़ा को समझने वाला कोई नहीं है। व्यवस्था ने भी आंखें मूंद ली हैं। स्थिति यह है कि पांच दिन के भीतर न्यूरोसर्जरी के करीब 20-25 मरीजों को रेफर किया जा चुका है।
मेरे पिता की रीढ़ की हड्डी का आपरेशन होना है। जूनियर डाक्टर न होने से आपरेशन नहीं हो पा रहा है। प्राइवेट अस्पताल तीन लाख रुपये मांग रहे हैं। गरीब आदमी हूं, इतना महंगा इलाज कराने में असमर्थ हूं। – प्रेम चंद्र, ओखलकांडा
काम के भार से दो दिन में दो जेआर ने छोड़ी नौकरी
न्यूरोसर्जरी विभाग में काम के दबाव से दो जनवरी को एक जूनियर डाक्टर (जेआर) ने इस्तीफा देकर तुरंत नौकरी छोड़ दी। वहीं बचे दो जेआर में से एक ने चार जनवरी को इस्तीफा दे दिया और नोटिस पीरियड पर चल रहा है। इनके अलावा सीनियर रेजिडेंट डाक्टर व कोई पीजी डाक्टर नहीं है। डाक्टरों की इस कमी से गंभीर मरीज यहां भर्ती नहीं किए जा रहे हैं।
गंभीर मरीजों को सीधे किया जा रहा हायर सेंटर रेफर
मंगलवार को हेड इंजरी के एक मरीज अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। बरेली रोड निवासी एक व्यापारी हैं। सुबह घर से दूध लेने निकले जहां उन्हें किसी ने टक्कर मारी और सिर पर चोट लग गई। गंभीर स्थिति होने से न्यूरोसर्जन ने उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया। जिसके बाद उनके तीमारदार परेशान इधर-उधर भागते नजर आए।
न्यूरो विभाग में जूनियर डाक्टर की कमी है। आपरेशन करने व उसके बाद मरीजों की देखभाल के लिए करीब छह जूनियर रेजिडेंट की आवश्यकता है। डाक्टरों की कमी से आपरेशन व नये मरीजों को भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। – डा. अभिषेक राज, विभागाध्यक्ष, न्यूरोसर्जरी विभाग