हाइवे के उस प्रत्येक खंड की मैपिंग होगी, जहां दिखते श्वान
हाइवे सुरक्षा को लेकर एसओपी में विशेष प्रविधान किए गए हैं। हाइवे के उस प्रत्येक खंड की मैपिंग की जाएगी, जहां निराश्रित गोवंश या श्वान नियमित रूप से दिखाई देते हैं। प्रत्येक चिह्नित खंड के लिए कम से कम एक जेई या उससे वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। निराश्रित पशु दिखने पर नोडल अधिकारी जियो-टैग फोटो के साथ तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को सूचना देगा।

सूचना मिलते ही नियंत्रण कक्ष उपलब्ध पशु पकड़ दल या गश्ती दल को सक्रिय करेगा और सटीक लोकेशन तक पहुंचने में सहयोग करेगा। जनपद स्तर पर क्षेत्रीय पशु पकड़ दलों का गठन किया जाएगा। देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी और नैनीताल जैसे अधिक प्रभावित जिलों में प्रति जनपद दो बड़े और दो छोटे पिक-अप वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि अन्य जिलों में एक बड़ा और एक छोटा पिक-अप वाहन तैनात किया जाएगा।

डिजिटल ऐप बताएगा आश्रय स्थलों का लाइव डेटा
एक डिजिटल ऐप भी विकसित करने की व्यवस्था की गई है। इसमें सभी आश्रय स्थलों का लाइव डेटा उपलब्ध रहेगा। पशुओं को केवल उन्हीं आश्रय स्थलों में ले जाया जाएगा, जहां क्षमता, भोजन और देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था होगी। इसके अलावा देहरादून, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल में 100-100 श्वानों की क्षमता वाले दो-दो डॉग शेल्टर होम स्थापित किए जाएंगे। एबीसी केंद्रों को इन शेल्टर होम्स से मैप किया जाएगा ताकि उपचार और पुनर्वास में कोई बाधा न आए।