पर्यटन विभाग इस ऐतिहासिक धरोहर को एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ झिलमिल झील सफारी का हिस्सा बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस पहल के तहत झिलमिल झील में वन्यजीवों के दीदार के लिए आने वाले पर्यटकों को अब आजादी से पहले के इतिहास से भी रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
जर्जर स्थिति में है जेल भवन
श्यामपुर स्थित यह जेल भवन फिलहाल जर्जर स्थिति में है, लेकिन इसकी दीवारें आज भी उस दौर की गवाही देती हैं, जब सुल्ताना डाकू अंग्रेज अफसरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। खुद पर हमलों से बौखलाए ब्रिटिश शासन ने सुल्ताना को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया था। 300 सैनिकों और 50 घुड़सवारों की बड़ी टुकड़ी तैनात की गई। अंततः 14 नवंबर 1923 को सुल्ताना डाकू को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे कुछ समय श्यामपुर क्षेत्र में रखा गया और फिर हल्द्वानी जेल भेज दिया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सात जुलाई को उसे फांसी दी गई।
यूपी का हिस्सा हुआ करता था तब श्यामपुर
उस समय हरिद्वार उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। तब सुल्ताना डाकू का गढ़ नजीबाबाद क्षेत्र माना जाता था, जहां उसका गुप्ता किला स्थित था। श्यामपुर का क्षेत्र उस दौर में घने जंगलों से घिरा हुआ था और नजीबाबाद से सटा होने के कारण सुल्ताना डाकू की गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता था। डाकू होने के बावजूद सुल्ताना लोगों के बीच इसलिए लोकप्रिय था, क्योंकि वह अंग्रेजों को निशाना बनाता था और लूट का माल गरीबों में बांट देता था।
हेरिटेज साइट के रूप में किया जाएगा विकास
पर्यटन विभाग की योजना के अनुसार, इस ब्रिटिशकालीन जेल भवन को संरक्षित कर हेरिटेज साइट के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां सुल्ताना डाकू के जीवन, उसके संघर्ष, अंग्रेजों से टकराव, गिरफ्तारी और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, इसे झिलमिल झील सफारी रूट से जोड़कर संयुक्त पर्यटन सर्किट बनाने की तैयारी भी है, जिससे हेरिटेज और एडवेंचर टूरिज्म का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
अंग्रेजों के काफिलों पर करता था हमला
सुल्ताना डाकू भारतीय इतिहास में ऐसे विद्रोही के रूप में दर्ज है, जिसने सीधे तौर पर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। वह अंग्रेजों के काफिलों को निशाना बनाता था और गरीबों का मददगार माना जाता था। इसी कारण उसे ‘इंडियन रॉबिनहुड’ कहा जाने लगा। सुल्ताना के गिरोह में करीब 300 डकैत शामिल थे, जो उस समय की बड़ी ताकत थी। उसने नजीबाबाद के पास वीरान किले को गुप्त ठिकाना बनाया था।
सुनार कोठी में छिपाया जाता था लूट का माल
हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित ‘सुनार कोठी’ को भी सुल्ताना डाकू से जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि अंग्रेजों से माल लूटने के बाद सुल्ताना अक्सर इसी जगह आकर छिपता था और लूट का माल यहीं रखा जाता था। वर्तमान में यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व में आता है, जहां आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित है। घने जंगलों के बीच स्थित यह जगह तब सुल्ताना के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने कहा कि श्यामपुर स्थित पुरानी जेल को एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ा जाएगा। सुल्ताना डाकू से जुड़ी पुरानी झील भी है, जिसे सामने लाने की योजना है। सुल्ताना डाकू को रॉबिन हुड के नाम से जाना जाता था। उसकी सक्रियता गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में रही। युवा पीढ़ी ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को जानने के लिए उत्सुक रहती है, इसलिए यह प्रयास रहेगा कि इस स्थल को भी एडवेंचर टूरिज्म से जोड़कर पर्यटकों तक जानकारी पहुंचाई जाए।