81 करोड़ से बुझेगी सितारगंज की प्यास, डीपीआर तैयार; नई योजना में ये होगा खास

सितारगंज के निवासियों को वर्षों पुरानी पेयजल समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी ने शहर की जल व्यवस्था को बदलने के लिए 81 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। इस योजना से वर्तमान जल संकट खत्म होगा और अगले तीन दशकों तक बढ़ती आबादी को पर्याप्त, सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध होगा। निर्माण कार्य लगभग पांच महीनों में शुरू हो जाएगा।

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सितारगंज । नगरवासियों के लिए वर्षों पुरानी पेयजल समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है। उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी (यूयूएसडीए) ने शहर की बदहाल जल व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। इस योजना के क्रियान्वयन से न केवल वर्तमान जल संकट खत्म होगा, बल्कि अगले तीन दशकों तक बढ़ती आबादी को भी पर्याप्त, सुरक्षित और नियमित पेयजल मिल सकेगा। योजना के लिए लगभग 81 करोड़ की डीपीआर तैयार हुई है।

शहर की कुल आबादी का महज 27 प्रतिशत ही पाइपलाइन से जुड़ा हुआ है। मात्र तीन ट्यूबवेल, दो ओवरहेड टैंक और करीब 28.5 किलोमीटर पुरानी वितरण लाइनों के भरोसे पूरी व्यवस्था चल रही है। अधिकांश वार्डों में लोगों को दिन में सिर्फ 2 से 4 घंटे पानी मिल पाता है। गर्मियों में स्थिति और विकट हो जाती है, जबकि कई मोहल्लों में टैंकर, हैंडपंप या निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है। जर्जर पाइपलाइनों से लीकेज, कम दबाव और पानी की बर्बादी आम है। मीटरिंग की कमी के कारण वितरण पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र, नई कालोनियों और तेजी से बढ़ती आबादी ने समस्या को और गहरा कर दिया है।

नई योजना में क्या होगा खास?
नई भूजल आधारित आधुनिक जलापूर्ति प्रणाली के तहत शहर के सभी 13 वार्डों को कवर किया जाएगा। इसके तहत आठ नए ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, 4 आधुनिक ओवरहेड टैंक का निर्माण होगा, पूरे शहर को 4 जोन और 6 डिस्ट्रिक्ट मीटरिंग एरिया में बांटा जाएगा, ताकि समान दबाव वाली आपूर्ति सुनिश्चित हो। 146 किलोमीटर नई वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी। कुल 8,529 घरेलू जल संयोजन किए जाएंगे। योजना पूरा होने पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी उपलब्ध होगा, जो वर्तमान स्थिति से कहीं बेहतर है।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया

डीपीआर में जनसंख्या वृद्धि का स्पष्ट अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना में करीब 31 हजार से अधिक आबादी वाले सितारगंज में 2027 तक आबादी 42 हजार से अधिक 2042 तक 53 हजार से अधिक 2057 तक 64 हजार से अधिक होने का अनुमान है।
ऐसे में जल मांग भी बढ़कर 2027 में 7.89 एमएलडी से 2057 में 11.62 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। पुरानी और अनुपयोगी संरचनाओं को हटाकर उसी जगह अधिक क्षमता वाली नई संरचनाएं बनाई जाएंगी।

लागत और क्रियान्वयन की स्थिति

पूरी परियोजना पर लगभग 80.90 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें पांच वर्षों का संचालन एवं रखरखाव भी शामिल है। अच्छी खबर यह है कि प्रस्तावित ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंकों के लिए जिला प्रशासन, जल संस्थान व अन्य विभागों से भूमि संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जिससे कार्य में बड़ी बाधा आने की संभावना नहीं है।

परियोजना प्रबंधक कुलदीप सिंह ने बताया कि करीब पांच महीनों में पेयजल योजना को धरातल पर उतारने के लिए निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना के पूर्ण होने के बाद सितारगंजवासियों को पेयजल को लेकर वर्तमान में आ रही दिक्कतों से स्थायी राहत मिल सकेगी और नगर में नियमित व पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित होगी।

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पंडित विराज कुमार शर्मा इस न्यूज़ पोर्टल के मुख्य संपादक हैं श्री विराज कुमार शर्मा ने लगभग 25 से अधिक वर्षों तक विभिन्न न्यूज पेपर्स के साथ कार्य किया है जैसे दैनिक आज शाह टाइम्स और मुख्यतः उन्होंने लगभग 24 वर्ष दैनिक जागरण के साथ कार्य किया है
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