उत्तरकाशी। बर्फबारी न होने के बावजूद हर्षिल घाटी में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। यहां अधिकतम तापमान माइनस 1 से 2 डिग्री तो न्यूनतम तापमान माइनस 12 से 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है।
इस कारण घाटी में नदी, नाले व पेयजल स्रोत जमते जा रहे हैं। सर्दी से बचाव का अलाव ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। वहीं, कई स्थानों पर लोगों को बर्फ को पिघला कर इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
दरअसल, शीतकाल में हर्षिल घाटी में जमकर बर्फबारी हुआ करती थी। सुक्की टाप क्षेत्र से ही सड़क पूरी तरह बर्फ से सफेद नजर आती थी। लेकिन इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज भी बदला-बदला सा है। घाटी में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है।
भागीरथी नदी का पानी भी किनारों पर जमा-जमा सा नजर आ रहा है। खीर गंगा का पानी भी जमता जा रहा है।
हर्षिल में कुछ होटल व होमस्टे जरूर खुले हैं, लेकिन होटल स्वामियों को पर्यटकों को पानी उपलब्ध कराने में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। यहां पेयजल लाइनों में पानी जम रहा है। पानी की टंकी में भी पानी जम रहा है।
इस कारण कई होटल स्वामी पानी की टंकी नहीं भर रहे हैं। गंगोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर आने वाले पानी के छोटे-छोटे स्रोत व झरने भी जमने लगे हैं। होटल व्यवसायी प्रकाश पंवार ने बताया कि उन्हें पीने का पानी जमने से उसे उबालकर ही इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
सोमवार को ग्रेटर नोएडा निवासी पर्यटक मोहित नागर, नीरज सिंह व हिमांशु रोहेला धराली पहुंचे। लेकिन यहां बर्फबारी न होने से वह मायूस नजर आए।
उन्होंने कहा कि वह पहले भी यहां आ चुके हैं, लेकिन इस बार यहां अब तक बर्फबारी न होना चौकाने वाला है। हालांकि वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता व आबोहवा को देखकर आनंदित नजर आए।