देहरादून। गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडलों को आपस में जोड़ने वाले वन मार्ग (कंडी रोड) रामनगर-कालागढ़-चिलरखाल-लालढांग के लालढांग-चिलरखाल (कोटद्वार) हिस्से के निर्माण की बड़ी बाधा दूर हो गई है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने करीब 11 किलोमीटर के इस हिस्से के निर्माण के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में यह जानकारी दी गई। बताया गया कि अब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में यह बात लाई जाएगी। वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलते ही इस सड़क का निर्माण प्रारंभ करा दिया जाएगा।
कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाली कंडी रोड एक दौर में गढ़वाल एवं कुमाऊं के बीच यातायात का अहम जरिया थी। इस पर पूर्व में कालागढ़ से हरिद्वार के बीच गंगा बस सर्विस भी चला करती थी। वर्ष 1991 में जंगल से गुजरने वाली इस सड़क के निर्माण के लिए 92 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। बाद में पर्यावरणीय कारणों के चलते उत्पन्न विवाद से मार्ग निर्माण खटाई में पड़ गया। विवाद कार्बेट टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले हिस्से को लेकर था। यद्यपि, गढ़वाल व कुमाऊं दोनों क्षेत्रों के लोग इस सड़क को आम यातायात के लिए खोलने की निरंतर मांग करते आ रहे हैं।
इस बीच त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल में कंडी रोड के राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले लालढांग-चिलरखाल मार्ग के निर्माण का निर्णय लिया गया और कुछ पुलों के साथ सड़क के निर्माण को कसरत शुरू हुई, लेकिन फिर मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया। सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने भी इस विषय का संज्ञान लिया। सीईसी ने सड़क का राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमोदन कराने के साथ ही निर्माण के सिलसिले में कई सुझाव राज्य सरकार को दिए। वन विभाग ने सीईसी के सुझावों को अमल में लाने के साथ ही इस सड़क के पुनरुद्धार के लिए विशेष अनुमति प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का दरवाजा खटखटाया। बोर्ड ने इसकी स्वीकृति दे दी है।
कोटद्वार से हरिद्वार व देहरादून के बीच घटेगी दूरी
लालढांग-चिलरखाल मार्ग वन क्षेत्र के भीतर है। पूर्व में लालढांग व चिलरखाल की तरफ से तीन-तीन किमी सड़क का डामरीकरण हुआ। साथ ही शेष पांच किमी हिस्से में बड़े पुल या एलिवेटेड रोड की बात हुई थी। वन विभाग के मुखिया मिश्र के अनुसार सीईसी ने इस मार्ग पर एलिवेटेड के स्थान पर काउज-वे बनाने समेत अन्य सुझाव दिए थे। इन पर सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि अब कोर्ट के आदेश के बाद सड़क का निर्माण प्रारंभ कर दिया जाएगा। वन विभाग डब्लूबीएम (वाटर बाउंड मैकेडम) विधि से यह सड़क बनाएगा। इसके निर्माण से उप्र से होकर गुजरने के झंझट से निजात मिलेगी। साथ ही कोटद्वार से हरिद्वार व देहरादून के बीच दूरी घटेगी।