देहरादून: पांच दशक पहले भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) से प्रशिक्षण पूरा कर पास आउट हुए जेंटलमैन कैडेट (अब रिटायर्ड सैन्य अधिकारी) सालों बाद अकादमी में एकत्र हुए। यह अवसर था 56वें व 57वें रेगुलर कोर्स और 40 तकनीकी कोर्स की गोल्डन जुबली री-यूनियन का।
21 दिसंबर 1975 को पास आउट होने वाला यह कोर्स ऐतिहासिक रूप से विशेष रहा, क्योंकि यह आइएमए का पहला स्नातक स्तर का कोर्स था। इस कोर्स के अधिकारी श्रीलंका में आपरेशन पवन, कारगिल युद्ध में आपरेशन विजय, कश्मीर में आतंकवादरोधी अभियानों, उत्तर पूर्व में आपरेशन रक्षक व आपरेशन राइनों, सियाचिन में आपरेशन मेघदूत, आपरेशन पराक्रम और आपरेशन फाल्कन सहित अनेक महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में हिस्सा लेकर राष्ट्र सेवा में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं।
इस कोर्स के अधिकारियों ने देश सेवा में कई सम्मान और वीरता पदक प्राप्त किए। इसमें से कई ने उच्च सैन्य पदों को सुशोभित किया, जिनमें 13 लेफ्टिनेंट जनरल, 25 मेजर जनरल और 50 से अधिक ब्रिगेडियर शामिल हैं। लेफ्टिनेंट जनरल संजीव मधोक और लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी सेना कमांडर के पद तक पहुंचे। इस कोर्स के 56 अधिकारियों ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया।
गोल्डन जुबली समारोह के दौरान 25 अधिकारियों ने नेत्रदान का संकल्प लेकर समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता और सेवा भावना का परिचय दिया। कार्यक्रम से पहले रिटायर अधिकारियों ने आइएमए के वार मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कोर्स के मुख्य समन्वयक ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा, कमांडर विजय भारद्वाज, ग्रुप कैप्टन एमएन सक्सेना समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अकादमी के वर्तमान सैन्य अधिकारियों ने रिटायर्ड अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें अकादमी के आधुनिक संरचनात्मक ढांचे व प्रशिक्षण स्तर में आए बदलावों की जानकारी दी।