UCC से जिहाद तक इन पांच मुद्दों से हिंदू राजनीति के केंद्र में आया उत्तराखंड, पूरे देश में इन्‍हें धार देगा विहिप

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अपनी केंद्रीय बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद, नकल जिहाद जैसे मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए हैं। उत्तराखंड में इन विषयों पर सरकार पहले से गंभीर है। विहिप अब इन मुद्दों को देशव्यापी स्तर पर ले जाने की तैयारी में है, ताकि लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय को मजबूती मिले। संगठन अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा स्पष्ट करने और शिक्षा को वैचारिक कट्टरता से मुक्त रखने पर भी जोर दे रहा है।

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Highlights
  • विहिप ने लैंड, लव, थूक, नकल जिहाद पर प्रस्ताव पारित किए
  • समान नागरिक संहिता को देशव्यापी लागू करने पर जोर दिया
  • अल्पसंख्यक परिभाषा स्पष्ट करने, शिक्षा सुधार की मांग की

 देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने तथा लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद व नकल जिहाद जैसे मामलों पर सख्त रुख अपनाने के बाद अब इन मुद्दों को विश्व हिंदू परिषद ने अपने केंद्रीय प्रस्ताव में शामिल कर हिंदू राजनीति के केंद्र में ला दिया है। विहिप संगठन ने पूरे देश में इन मुद्दों को धार देने का काम शुरू कर दिया है।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विश्व हिंदू परिषद इसे आधार बनाकर देश के सभी राज्यों में लागू कराने की कवायद में जुट गया है, ताकि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो सके।

विहिप का मानना है कि इससे न केवल लैंगिक समानता तथा सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी, बल्कि एक देश, एक कानून की अवधारणा सुदृढ़ होगी। समान नागरिक संहिता समेत लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद, नकल जिहाद का प्रस्ताव भी मेरठ में हुई विहिप की केंद्रीय प्रन्यासी मंडल बैठक में पारित किया गया। उत्तराखंड में पहले ही इन विषयों को लेकर राज्य की सरकार गंभीर है।

आगामी तीन-चार जनवरी को हल्द्वानी में प्रस्तावित प्रांतीय बैठक में ये मुद्दे उठाकर विहिप सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श के स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। विहिप अपने प्रस्तावों पर कार्य करते हुए अवैध अतिक्रमण, जनसांख्यिकीय असंतुलन, धर्मांतरण अभियान, थूक-नकल जिहाद से उपज रहे सामाजिक अविश्वास की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना चाहती है।

स्पष्ट हो अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा
विश्व हिंदू परिषद अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा को लेकर नया अभियान छेड़ने जा रहा है। विहिप की केंद्रीय बैठक में कहा गया कि संवैधानिक व्यवस्था में अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे नीति निर्माण में असंतुलन पैदा होता है। जनसंख्या अनुपात व वैश्विक परिप्रेक्ष्य के आधार पर अल्पसंख्यक की परिभाषा पर पुनर्विचार हो। विहिप का कहना है, प्रत्येक राज्य में आबादी के अनुसार अल्पसंख्यकों का निर्धारण किया जाए।

वैचारिक कट्टरता से मुक्त हो शिक्षा
विहिप ने अल्पसंख्यक शिक्षा व मदरसों से जुड़े विषय भी अपने प्रस्ताव में शामिल किए। इनमें संबंधित शैक्षणिक संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता, पाठ्यक्रम की निगरानी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सुधार व विदेशी फंडिंग की जांच जैसे बिंदुओं पर जोर दिया गया है। विहिप का कहना है, शिक्षा व्यवस्था किसी भी प्रकार की वैचारिक कट्टरता से मुक्त रहनी चाहिए और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।

‘विश्व हिंदू परिषद ने लैंड जिहाद-लव जिहाद से लेकर सभी प्रकार के जिहाद व समान नागरिक संहिता के विषय को अपने केंद्रीय प्रस्ताव में शामिल किया है। अब यह विहिप की केंद्रीय रणनीति व कार्ययोजना का हिस्सा है। इस पर सभी राज्यों में समान रूप से कार्य किया जाएगा।’ -विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिंदू परिषद

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पंडित विराज कुमार शर्मा इस न्यूज़ पोर्टल के मुख्य संपादक हैं श्री विराज कुमार शर्मा ने लगभग 25 से अधिक वर्षों तक विभिन्न न्यूज पेपर्स के साथ कार्य किया है जैसे दैनिक आज शाह टाइम्स और मुख्यतः उन्होंने लगभग 24 वर्ष दैनिक जागरण के साथ कार्य किया है
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